चंचल मिश्रा
नाम है मेरा।
पतंग उड़ाना
काम है मेरा।
मैं चलता हूँ ।
आड़े-तिरछे
चला करता हूँ।
जब सीढ़ी
चढ़ना होता है
दो को छोड़
तीसरे पर
पाँव रखता हूँ ।
नहीं दिन
ऐसा कोई होता
दो बार
जब सर
नहीं फूटता !
पर रोने का
नाम नहीं लेता ।
हँस-हँस कर
टाल देता हूँ ।
विडियो गेम
खेल लेता हूँ ।
कॉमिक्स भी
पढ़ लेता हूँ ।
नहीं रहते जब
पापा घर पर
कार्टून तब
देख लेता हूँ ।
होम वर्क पूरा
करता हूँ ।
पढ़ता कम हूँ
नंबर तो
ज्यादा लाता हूँ ।
कहते मास्टर –
तेज और
सीधा –सादा है ।
पापा कहते-
बदमाश यह
बहुत बड़ा है ।
मम्मी ऐसा
कुछ नहीं कहती-
खाने में
बड़ा नखरा है-
यही शिकायत
रहती है उसकी ।
पढ़ाते रहते
दादा हिन्दी।
दादी कहती-
होनहार है
पोता मेरा ।
सच में
क्या हूँ मैं
अब आप बताओ ?

