दादी मेरी
दादी मेरी दादी मेरी
।
बूढ़ी-सी है दादी
मेरी ।
दादी के सफ़ेद बाल
हैं
जो छुने में मखमल
जैसा।
कंठी –माला है गले
में
गिनती के दाँत बचे
हैं ।
दूध रोटी खाती है
दादी ।
मेरे उठने के पहले
ही
पूजा- कर लेती है
दादी।
भोग लगाती है गोपाल
को
लड्डू रोज पाँच बेसन
के ।
अदल-बदल कर मोटा
चश्मा
पढ़ती है रामायण दादी
।
राम जब वन को जाते
कैकेयी को कोसती दादी।
पढ़ते –पढ़ते रामायण जब
दादी खाँसने लग जाती
है
पीती है तब थोड़ा पानी
खाती है मीठी-छोटी गोली ।
होता है जब दर्द
घुटने में
तेल मालिस कर लेती
दादी।
होम –वर्क जब पूरा
होता
भरथरी-चरित सुनाती
दादी।
सुनने आतीं कुछ
सहेली मेरी
जिनके नहीं होतीं है
दादी ।


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