शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

बाल-वृन्द के लिए यह एक रचना : समय (प्रेमकुमार)




               
समय


कहता है क्या समय ?
सुन लो तुम जरा-सा।
स    साथ दूंगा
म    मैं तुम्हारा
य    यदि कहा
मानोगे मेरा ।
सोच-समझ कर
काम करो तुम
साथ दूंगा सदा
तुम्हारा ।
देखो सूरज
सुबह उगता है
शाम हुई तो
ढल जाता है ।
अपने नियम के
अनुसार ही
चाँद अपने
रूप सवांरता ।
हवा निरंतर
बहती रहती
लहरें नहीं
कभी रुकती है ।
पल सेकंड
मिनट घंटे
दिन सप्ताह
और पखवारे
मास वर्ष
और शताब्दी में
रखते हैं सब
हिसाब हमारा ।
पर मैं कभी
नहीं रुकता हूँ
रुकती नहीं जैसे
सांस तुम्हारी ।
जो मेरे साथ चले
साथी हूँ
मैं उसका ।
सपने उसके
साकार करूंगा
साथ-साथ जो
चलेगा मेरे ।







गुरुवार, 19 सितंबर 2013

गाँव में ईद

(13)


गाँव में ईद


कूकड़ूँ – कूँ
कूकड़ूँ – कूँ
मुर्गे ने बांग दी।
चीं चीं
फुदकी
चिड़ियाँ
चह चहचाही।
गुटरूँ-गुटरूँ
पड्रोसी की कबूतरी बोली।
सब सुन कर
पंडित जी की गाय
भी रंभाई।
तब दूर-दराज की मस्जिद का
मौलवी क्यों सोता?
पाक-साफ होकर
लौड्स्पीकर से ---
उसने भी चेताया---
हड्बड़ा कर उठे
तब छोटे मियां।---
अब्बू दे चुके थे दाना
मुर्गा-मुर्गी को ।
पंडित जी की गाय
खा रही थी सानी ।
पड्रोसी की कबूतरी
चुग रही थी दाना ।
और अम्मीजान ने
बना लिया था ईद का पूरा खाना
गोस्त-कबाब और कई तरह की
सेवइयाँ ।
छोटे मियां  का जी ललचाया---
अपने को फिर समझाया---
पहले तैयार होना है
नए-नए कपड़े और
जाली वाली टोपी
पहन कर
अब्बू के साथ नमाज पढ़ना है।
दोस्तों से गले मिल कर
मुबारकवाद लेना-देना है
नाना –नानी,दादा-दादी
और चाचू से ईदी लेना है---
तब  कभी  खाना-पीना है।
बारह तो बज ही जाएंगे ।
और पंडित के लड़के
रामनरेश को
सांझ ढले तो
छुप-छुपाके
सेवइयाँ खिलाना है 


बाघ को गुस्सा क्यों आता है ?

(12)
बाघ को गुस्सा क्यों आता है ?


• घनी रात में
• बीहड़ वन में
• दबे पावों
• जब कोई आता
• टीन बजा कर
• आग सुलगा कर
• रोशनी का
• जब  जाल बिछाता
• बिना खौफ़ के
• जल्दी-जल्दी
• छोटे –बड़े
• इन पेड़ों को
• लगता काटने।
• गुस्सा आता है तब
• बाघ को ।

• दूर- दराज से
• लौटती चिड़ियाँ
• पाती नहीं
• अपना घोंसला
• दर्द भरी
• चीं-चीं सुन कर
• दिल पिघलता है
• जब उसका
• गुस्सा तब आता है बाघ को।

• जब बोलती
• बेवश होकर
• हिरणी की माता
• गोली मारा
• मेरी बेटी को
• और उठा ले गए
• उसकी मुंह-बोली
• बहन शीतली’ को
• मैं बच गयी
• नहीं तो अनाथ
• हो जाता  बबुआ ।,
• गाड़ी में भर कर
• आए थे नवजवान
• शहर के ।
• और कर गए
• यह उपकार हमारा ।
• आँखों में थे आँसू
• पर गुस्सा आया  तब बाघ को ।

• कटते जाते पेंड यहाँ से
• वन-रक्षक की मिली-भगत से
• नदी-नालों पर पुल बन गए ।
• आवाजाही शुरू हो गयी
• सुरसा की तरह शहर फैल गया
• बचा-खुचा  जंगल है अब तो
• सदियों का यह  ठौर- ठिकाना
• उजड-रहा है –उजड़ रहा है
•  यही-देख कर गुस्सा आता है बाघ को
• शेर ने बहुत समझाया
• गुस्सा करना बहुत बुरा है
• जितना जंगल बचा हुआ है
• उसमें  ही  मरना-खपना है
•  समय बदल गया है
• रहा नहीं अब जंगल अपना ।
• न रहा मैं अब जंगल का राजा ।
• बूढ़े शेर की बात
• बाघ समझ नहीं पाता
• इसीलिए तो आता है गुस्सा !






वह है हीरा !




(11)

वह है हीरा !
 


वह है हीरा !
ईश्वर का उपहार है हीरा ।
इन्द्र्देव की श्रीष्टि  हीरा।
वज्र उनका था तो हीरा ।
देवों का आसूं है हीरा ।
कामदेव का तीर नुकीला
और उसमें जड़ा था हीरा ।
ग्रीक की धारणा है यह
टूटे तारों से ढला है हीरा ।
बौद्ध-भिक्षुओं की
किवदंती -
एक  राजा  की
बलि हुई थी और
उनकी जली हड्डियों से
बना था हीरा ।
इन बातों को
छोड़ो- छोड़ो
ऐसा कोई प्रमाण नहीं है।
 
अरबों-खरबों सालों पहले
प्रलय की किसी घड़ी में
पेड़-पौधे  और
जल - थल के 
जीव-जन्तु सब
समा गए थे पाताल-लोक में।
और अग्नि की  भीषण  ज्वाला से
बनते गए काले- कोयले ।
फिर कोई भाग्यशाली कोयला
कैसे बना हीरा का टुकड़ा
यह   कहना मुश्किल है भाई ।
भूगर्भ –शास्त्र जब पढ़ोगे
तब खुलेगा  यह रहस्य निराला।
अभी तो मानो
कार्बन है यह हीरा।



पर हीरा  का अरमान बड़ा है
अभिमानी है , कठोर बहुत है
जब से आया
सदियाँ बीती
सबने उसका मान बढ़ाया
सतयुग –त्रेता और द्वापर
हर युग में अनमोल रहा है
क्या कारण है ?
द्वारकाधीश ने
युद्ध में क्यों  जीता था हीरा। 
पर वे भी  न रख पाये
चुरा लिया था उनसे  भी  हीरा।
ऐसे में फिर क्यों न बढ़ता
शान हीरा का।
ऐसे में फिर क्यों न ढूँढे
लिखित इतिहास हीरे का।
लेखा-जोखा करके देखा
चार हजार साल
पुराना है
इतिहास हीरे का ।
महान देश है हमारा
जिसने दिखाया दुनिया को पहला हीरा
गोलकुंडा की शाख बढ़ गयी
भारत की धाक जाम गयी
ढूँढने लगे सब
अपने-अपने देशों मे
 उज्जवल और  शाश्वत  हीरा 

गिनती

 
(10) 
 
•गिनती

एक ईश्वर
एक ख़ुदा
और एक जीसस 
सूरज एक
चाँद एक
और एक आसमान ।
जगत का श्रीष्टिकर्ता -
ब्रह्मा  एक है।

एक के बाद
आया दो ।
शिव-पार्वती
गणेश- लक्ष्मी
राधा – कृष्ण
क्या नहीं हैं दो ?
तीन बीच में बोल पड़ा
तीन देव हैं-
ब्रह्मा-विष्णु -महेश
और त्रिनेत्र हैं
देवों के देव महादेव।
बेलपत्र में तीन पात हैं
जिससे पूजे जाते शिव ।

चार था गुमसुम
बोला उसने-
ब्रह्मा जी के चार मुख
चार भुजाएँ लक्ष्मी-सरस्वती की ।
चार वेद हैं वेदव्यास के ।
चार दिशाओं से आतीं है
जीवनदायनी मंद हवाएँ ।

पाँच का तो बड़ा भाग्य है
पंचमुखी हनुमान हैं
पंचामृत ही महा प्रसाद है
पाँच तत्व से  निर्मित काया
पञ्च -तत्व मैं विलीन होती है ।

अब छ्ह कि बारी आई –
वह निराश क्यों कर होगा?
छ्ह ऋतुयों से सजती धरती ।
छठ तो महान पर्व है
सूर्यदेव की होती पूजा ।

सात है कला का प्रेमी
इंद्र्धनुष के सात रंगों में
घुला-मिला है ।
नारद की वीणा से निकला
सप्त स्वर है ।
और है दिवस सात ।

आठ तो पूजनीय है ।
अष्टमी के दिन
कृष्ण - जन्म का
उत्सव   होता 
जन्माष्टमी महापर्व है ।
माँ दुर्गा की आठ भुजाएँ
सजती है अस्त्र-शस्त्र से ।

नवमी के दिन
हुये प्रभु प्रगट  कृपाला ।             
नव ग्रह की पूजा होती ।
नव कलश सजते
नवरस है जीवन के ।

दसमी तो विजयादशमी है ।
दशानन का वध हुआ था ।
अनाचार का अंत हुआ था ।
यों  दस -
दो अंकों का जोड़ा
एक के बारे में जाना
और शून्य -
दर्शनशास्त्र का अभिन्न अंग है।
जीवन शून्य है ...
शून्य दिया भारत ने
विश्व को अनूठा  उपहार ।






एक से पाँच



(9) 

•  एक से पाँच



एक से पाँच
मिनी एक
रानु आई ,
मिनी –रानू
हो गए दो।
जेनी भी आई
मिनी रानू जेनी
हो गए तीन ।
तान्या आई
मिनी रानू जेनी तान्या
हो गए चार
समर्थ आया
फिर
मिनी रानू जेनी तान्या और समर्थ
हो गए पाँच
पांचों  ने एक खेल
रचाया
घंटे बीते
पता नहीं चला ।
चारों ने देखा
जेनी किधर गयी ?
रानू दीदी गयी ढूँढने
बच गए तीन ।
तान्या की मम्मी आई
तान्या चली गयी ।
बच गए दो
बालकोनी से
समर्थ के दादू ने
आवाज लगायी।
गया समर्थ ।
रह गयी मिनी एक ।
 

तिरंगा प्यारा

(8)
तिरंगा प्यारा


तिरंगा प्यारा
तीन रंगों से बना तिरंगा
मेरे देश का  है यह   झण्डा ।
रंग पहला  है केसरिया
साहस- बलिदान दर्शाता ।
और  सफेद
सादगी का संदेश  देता ।
खुशहाली  है हरा रंग 
अपनी धरती का ।
बीच में चमकता
अशोक चक्र
कहता है
सदियों का सफर
हमारा
रुकना नहीं ,
चलते रहना है ।
शहीदों के बलिदानों से
मिला  है यह   तिरंगा
शान से फहराना तुम
यह महान  तिरंगा झण्डा ।






आठ तोरी ... रानू ने तोड़ी •

(7) 
•आठ तोरी    ... रानू ने तोड़ी


अल्लाह ! अल्लाह !
सुभान अल्लाह !
कितना मेहरवान 

•• है तू !
बिना ईद के
ईदी दे दी
रानू बिटिया को 1
बिन छप्पड के
खुले गगन में
टपका दी
आठ-आठ   तोरी !
तोहफा तेरा
सज गया है
दो टोकरी में ।
देखेंगे  बंदे
करिश्माई तेरी!











(8)


आज की तोरी

(6) 




आज की तोरी





आज की तोरी
बड़ी छोटी
मोटी पतली
हरी-हरी
रानू ने तोरी
अपनी बगिया से ।
देखने वाले देखते रहे
किसी का जी जुराया
किसी का मन ललचाया
और किसी के दिल पर
साँप लॉट गया ।
गहरी नी़द मे़  सोने वाले
 
वंचित रह गए
नहीं देखा तोड़ते तोरी ।
कला  विहार में बंटी मौसी
और चेन्नई में
देखेंगी सीमा मौसी
टोकरी में  तोरी ।
नाना- नानी देख रहें हैं
कैसे बैठीं हैं
सज संवर  कर
सयानी तोरी ।
नानी पर अनलकी निकली
तोड़ लिया था उनका
दो पपीता
पानी वाले ने ।





रानु की जेनी

(5)
रानु की जेनी





रानु    की  जेनी
बदन गुदगुदा         
ढुलमुल चाल
फर्र है उजली
जीभ है मोटी
आँख है छोटी
नाखून लम्बी
डील-डौल है
भारी –भारी
ऐसी है रानू की जेनी !
सीधी –सादी
गुमसुम रहती
बिस्कुट देख लपलपाती
बर्तन एक में खाना खाती
एक दरी पर सोती –जगती
आठों पहर चौकन्ने रहती
बिना रानू के बेचैन रहती
ऐसी है रानू की जेनी!
जेनी की आँखों में रानू
और रानू की सांस है जेनी
मिनी की  तो प्यारी जेनी
भू: भू: करती उसकी   जेनी
रानू –जेनी मिनी-जेनी
मिनी-रानू  रानू -मिनी
 
एक माला में गुथी कहानी!





सालगिरह का तोहफ़ा

(4)

सालगिरह का तोहफ़ा


माह सितंबर 
दिन पच्चीस है
नील-गगन की 
वह परी है
पंख सफ़ेद
मोती जरी है
आँखें चंचल
बातें करती है 
और ओठें 
मुस्कान भरी है ।
सालगिरह है
उसकी पाँचवीं ।
कहते हैं
दसवीं जैसी
समझदार है
तर्क देती है
बारहवीं जैसी ।
कपड़ों की 
शौकीन बहुत है 
सजने-धजने में    
सखी-सहेली से
आगे रहती है ।
चित्र खिचाने में
सोलहवीं जैसी 
पोज़ देती है 
कहते हैं सब
क्यूट बहुत है ।
रंग भरती 
खाली चित्रों में
नृत्य   सीखती
है क्लासिकल 
तलवार भांजती
लक्ष्मी बाई 
जैसी मुद्रा में ।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा
जय-जय गान
करती है ।

खो जाती है
सपनों में
जब पढ़ती है
मछली जल की रानी है..  

फव्वारे हों 
या हों 
जल की धारा
घाट किनारे...
हो जाती है
उन्मादित 
मछली की भांति
जल देख कर
लगता है
गगन परी नहीं
जल परी हो ।
सोचता हूँ मैं
क्या तोहफा दूँ
उसके इस
सालगिरह में 
जो खुद तोहफा हो
उस परवरदिगार का...
उनसे ही मांगू
वरदान...मन्नतें...और Blessings
क्यों न उसके लिए ?




सुबह निराली है आज

(3) 
 

सुबह निराली है आज
 
 
सुबह निराली है आज
बादलों से ढका है सूरज
समय का अंदाज नहीं है
दिखीं नहीं नन्ही चिड़िया
कबूतर नहीं बाल्कनी में
गिलहरी सोयी है अब तक
कलियाँ भी खिली नहीं गमले में ।
फिर मिनी कैसे उठ गयी ऐसे में ?
 
आया था उसका नया ड्रेस
कुर्ता पायजामा शेरवानी और टोपी सफ़ेद
हाथ में झण्डा लेकर जाना था स्कूल
फिर कैसे नहीं उठती मिनी?
सूरज को भी लाज आ गयी
सुनहली किरणें फैल गयी थी
गिलहरी को भूख लग गयी
गुटरूँ-गूँ भी आया गया था
कलियाँ खिल गईं थी गमले में।
वंदे मातरम...
भारत माता की जय ...
झण्डा लेकर निकल पड़ी मिनी ।
आजादी का रंग बिखरने...
 


(4)

मिनी का सपना

(2)


मिनी का सपना


 


 मिनी का सपना
•         फूलों का जंगल
•         खरगोश की बस्ती
•         परियों के संग -
•      झूला
•         झूल रही थी मिनी !
•         आया  तब  
•         शेर भालू बंदर
•         और आई हंटर लिए रानू दीदी1
•         भालू ने किया सलाम
•         शेर ने बाँटी टाफी
•         बंदर ने दिया आईस्क्रीम`!
•         सभी गले मिले
•         हाथ पकड़ घूमने चले  -
•         नदी किनारे I
•         स्वागत मे खड़ी थीं वहाँ
•         छोटी-छोटी ,रंग –बिरंगी
•         मोतियों की माला लिए
•         मछलियों की महारानी!
•         सभी परियाँ और खरगोश
•         बंदर -भालू और शेर ने
•         माले       पहने !
•         महारानी ने गले लगाये
•         रानु दीदी और मिनी को
•         पहनाया
•         बड़े बड़े मोतियों की माला !
•         महारानी ने तभी बताया
•         बर्थ डे है आज हमारा!
•         बोटिंग होगी -
•         होगा नाच –गाना
•         मस्ती से होगा खाना-पीना !
•         सजे नाव में बैठे सब
•         शेर भालू ने पतवार संभाला
•         बंदर ने नाच दिखाया
•         खरगोश ने गीत  सुनाये
•         परियों ने पिज्जे पडोसे!
•         रानू – मिनी कों मिला
•         रिटर्न गिफ्ट
•         महारानी  से -
•         मिनी ने लिया
•         जापानी गुड़िया
•         और रानू  ने लैपटाप1
•         सबने कहा- थैंक्स !
•         गूंज उठा –वेलकम-वेलकम
•         बजी तभी बांसुरी दादू की
•         उठी नींद से मिनी रानी1
•         टूटा सपना
•         उठो उठो स्कूल  चलनाहै!
•         क्या करती अब मिनी रानी ?