बाल-वृन्द के लिए एक रचना:
लाल बहादुर शास्त्री के जन्म- दिवस पर
यह रचना प्रस्तुत है
लाल बहादुर शास्त्री
लोभ नहीं था अपने पद का
धन –दौलत का लालच न था
कद तो छोटा –सा था उसका
पर दिल का बडा बहादुर था ।
न था अपना हाथी- घोड़ा
न राजमहल का प्राणी था
साधारण परिवार था उसका
शिक्षा –दीक्षा भी यहीं हुई
विद्यापीठ से पास किया था
डिग्री शास्त्री पाया था
स्वदेशी था धर्म उसका
भाई –चारा का हामी था
सादगी का जीवन जिआ
मितभाषी मितव्वयी था
धोती कुर्ता और सफेद टोपी
सादे लिवास का आदि था ।
देश –प्रेम से नाता जोडा
गांधी का अनुयायी था
।
स्वाभिमान का पुतला था वह
भारत का मान बढ़ाया था
प्रधान –मंत्री था वह देश का
पर संतरी कहलाता था
जय जवान का नारा देकर
सैनिक को ललकारा था
नारा देकर जय किसान का
देश खुशहाल बनाया था ।
राजा राम तपस्वी था
यह सच कर दिखलाया था ।
नमन करो ! नमन करो !
इस युग पुरुष को !
इस युग में, अन्य कोई न आयेगा !
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