(13)
•
•
• गाँव में ईद
•
•
• कूकड़ूँ – कूँ
• कूकड़ूँ – कूँ
• मुर्गे ने बांग दी।
• चीं चीं
• फुदकी
• चिड़ियाँ
• चह चहचाही।
• गुटरूँ-गुटरूँ
• पड्रोसी की कबूतरी बोली।
• सब सुन कर
• पंडित जी की गाय
• भी रंभाई।
• तब दूर-दराज की मस्जिद का
• मौलवी क्यों सोता?
• पाक-साफ होकर
• लौड्स्पीकर से ---
• उसने भी चेताया---
• हड्बड़ा कर उठे
• तब छोटे मियां।---
• अब्बू दे चुके थे दाना
• मुर्गा-मुर्गी को ।
• पंडित जी की गाय
• खा रही थी सानी ।
• पड्रोसी की कबूतरी
• चुग रही थी दाना ।
• और अम्मीजान ने
• बना लिया था ईद का पूरा खाना
• गोस्त-कबाब और कई तरह की
• सेवइयाँ ।
• छोटे मियां का जी ललचाया---
• अपने को फिर समझाया---
• पहले तैयार होना है
• नए-नए कपड़े और
• जाली वाली टोपी
• पहन कर
• अब्बू के साथ नमाज पढ़ना है।
• दोस्तों से गले मिल कर
• मुबारकवाद लेना-देना है
• नाना –नानी,दादा-दादी
• और चाचू से ईदी लेना है---
• तब कभी खाना-पीना है।
• बारह तो बज ही जाएंगे ।
• और पंडित के लड़के
• रामनरेश को
• सांझ ढले तो
• छुप-छुपाके
• सेवइयाँ खिलाना है
•
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• गाँव में ईद
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• कूकड़ूँ – कूँ
• कूकड़ूँ – कूँ
• मुर्गे ने बांग दी।
• चीं चीं
• फुदकी
• चिड़ियाँ
• चह चहचाही।
• गुटरूँ-गुटरूँ
• पड्रोसी की कबूतरी बोली।
• सब सुन कर
• पंडित जी की गाय
• भी रंभाई।
• तब दूर-दराज की मस्जिद का
• मौलवी क्यों सोता?
• पाक-साफ होकर
• लौड्स्पीकर से ---
• उसने भी चेताया---
• हड्बड़ा कर उठे
• तब छोटे मियां।---
• अब्बू दे चुके थे दाना
• मुर्गा-मुर्गी को ।
• पंडित जी की गाय
• खा रही थी सानी ।
• पड्रोसी की कबूतरी
• चुग रही थी दाना ।
• और अम्मीजान ने
• बना लिया था ईद का पूरा खाना
• गोस्त-कबाब और कई तरह की
• सेवइयाँ ।
• छोटे मियां का जी ललचाया---
• अपने को फिर समझाया---
• पहले तैयार होना है
• नए-नए कपड़े और
• जाली वाली टोपी
• पहन कर
• अब्बू के साथ नमाज पढ़ना है।
• दोस्तों से गले मिल कर
• मुबारकवाद लेना-देना है
• नाना –नानी,दादा-दादी
• और चाचू से ईदी लेना है---
• तब कभी खाना-पीना है।
• बारह तो बज ही जाएंगे ।
• और पंडित के लड़के
• रामनरेश को
• सांझ ढले तो
• छुप-छुपाके
• सेवइयाँ खिलाना है
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