गुरुवार, 19 सितंबर 2013

सुबह निराली है आज

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सुबह निराली है आज
 
 
सुबह निराली है आज
बादलों से ढका है सूरज
समय का अंदाज नहीं है
दिखीं नहीं नन्ही चिड़िया
कबूतर नहीं बाल्कनी में
गिलहरी सोयी है अब तक
कलियाँ भी खिली नहीं गमले में ।
फिर मिनी कैसे उठ गयी ऐसे में ?
 
आया था उसका नया ड्रेस
कुर्ता पायजामा शेरवानी और टोपी सफ़ेद
हाथ में झण्डा लेकर जाना था स्कूल
फिर कैसे नहीं उठती मिनी?
सूरज को भी लाज आ गयी
सुनहली किरणें फैल गयी थी
गिलहरी को भूख लग गयी
गुटरूँ-गूँ भी आया गया था
कलियाँ खिल गईं थी गमले में।
वंदे मातरम...
भारत माता की जय ...
झण्डा लेकर निकल पड़ी मिनी ।
आजादी का रंग बिखरने...
 


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