गुरुवार, 19 सितंबर 2013

वह है हीरा !




(11)

वह है हीरा !
 


वह है हीरा !
ईश्वर का उपहार है हीरा ।
इन्द्र्देव की श्रीष्टि  हीरा।
वज्र उनका था तो हीरा ।
देवों का आसूं है हीरा ।
कामदेव का तीर नुकीला
और उसमें जड़ा था हीरा ।
ग्रीक की धारणा है यह
टूटे तारों से ढला है हीरा ।
बौद्ध-भिक्षुओं की
किवदंती -
एक  राजा  की
बलि हुई थी और
उनकी जली हड्डियों से
बना था हीरा ।
इन बातों को
छोड़ो- छोड़ो
ऐसा कोई प्रमाण नहीं है।
 
अरबों-खरबों सालों पहले
प्रलय की किसी घड़ी में
पेड़-पौधे  और
जल - थल के 
जीव-जन्तु सब
समा गए थे पाताल-लोक में।
और अग्नि की  भीषण  ज्वाला से
बनते गए काले- कोयले ।
फिर कोई भाग्यशाली कोयला
कैसे बना हीरा का टुकड़ा
यह   कहना मुश्किल है भाई ।
भूगर्भ –शास्त्र जब पढ़ोगे
तब खुलेगा  यह रहस्य निराला।
अभी तो मानो
कार्बन है यह हीरा।



पर हीरा  का अरमान बड़ा है
अभिमानी है , कठोर बहुत है
जब से आया
सदियाँ बीती
सबने उसका मान बढ़ाया
सतयुग –त्रेता और द्वापर
हर युग में अनमोल रहा है
क्या कारण है ?
द्वारकाधीश ने
युद्ध में क्यों  जीता था हीरा। 
पर वे भी  न रख पाये
चुरा लिया था उनसे  भी  हीरा।
ऐसे में फिर क्यों न बढ़ता
शान हीरा का।
ऐसे में फिर क्यों न ढूँढे
लिखित इतिहास हीरे का।
लेखा-जोखा करके देखा
चार हजार साल
पुराना है
इतिहास हीरे का ।
महान देश है हमारा
जिसने दिखाया दुनिया को पहला हीरा
गोलकुंडा की शाख बढ़ गयी
भारत की धाक जाम गयी
ढूँढने लगे सब
अपने-अपने देशों मे
 उज्जवल और  शाश्वत  हीरा 

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