(4)
सालगिरह का तोहफ़ा
माह सितंबर
दिन पच्चीस है
नील-गगन की
वह परी है
पंख सफ़ेद
मोती जरी है
आँखें चंचल
बातें करती है
और ओठें
मुस्कान भरी है ।
सालगिरह है
उसकी पाँचवीं ।
कहते हैं
दसवीं जैसी
समझदार है
तर्क देती है
बारहवीं जैसी ।
कपड़ों की
शौकीन बहुत है
सजने-धजने में
सखी-सहेली से
आगे रहती है ।
चित्र खिचाने में
सोलहवीं जैसी
पोज़ देती है
कहते हैं सब
क्यूट बहुत है ।
रंग भरती
खाली चित्रों में
नृत्य सीखती
है क्लासिकल
तलवार भांजती
लक्ष्मी बाई
जैसी मुद्रा में ।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा
जय-जय गान
करती है ।
खो जाती है
सपनों में
जब पढ़ती है
मछली जल की रानी है..
फव्वारे हों
सालगिरह का तोहफ़ा
माह सितंबर
दिन पच्चीस है
नील-गगन की
वह परी है
पंख सफ़ेद
मोती जरी है
आँखें चंचल
बातें करती है
और ओठें
मुस्कान भरी है ।
सालगिरह है
उसकी पाँचवीं ।
कहते हैं
दसवीं जैसी
समझदार है
तर्क देती है
बारहवीं जैसी ।
कपड़ों की
शौकीन बहुत है
सजने-धजने में
सखी-सहेली से
आगे रहती है ।
चित्र खिचाने में
सोलहवीं जैसी
पोज़ देती है
कहते हैं सब
क्यूट बहुत है ।
रंग भरती
खाली चित्रों में
नृत्य सीखती
है क्लासिकल
तलवार भांजती
लक्ष्मी बाई
जैसी मुद्रा में ।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा
जय-जय गान
करती है ।
खो जाती है
सपनों में
जब पढ़ती है
मछली जल की रानी है..
फव्वारे हों
या हों
जल की धारा
घाट किनारे...
हो जाती है
उन्मादित
मछली की भांति
जल देख कर
लगता है
गगन परी नहीं
जल परी हो ।
सोचता हूँ मैं
क्या तोहफा दूँ
उसके इस
सालगिरह में
जो खुद तोहफा हो
उस परवरदिगार का...
उनसे ही मांगू
वरदान...मन्नतें...और Blessings
क्यों न उसके लिए ?
जल की धारा
घाट किनारे...
हो जाती है
उन्मादित
मछली की भांति
जल देख कर
लगता है
गगन परी नहीं
जल परी हो ।
सोचता हूँ मैं
क्या तोहफा दूँ
उसके इस
सालगिरह में
जो खुद तोहफा हो
उस परवरदिगार का...
उनसे ही मांगू
वरदान...मन्नतें...और Blessings
क्यों न उसके लिए ?
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