गुरुवार, 19 सितंबर 2013

रानु की जेनी

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रानु की जेनी





रानु    की  जेनी
बदन गुदगुदा         
ढुलमुल चाल
फर्र है उजली
जीभ है मोटी
आँख है छोटी
नाखून लम्बी
डील-डौल है
भारी –भारी
ऐसी है रानू की जेनी !
सीधी –सादी
गुमसुम रहती
बिस्कुट देख लपलपाती
बर्तन एक में खाना खाती
एक दरी पर सोती –जगती
आठों पहर चौकन्ने रहती
बिना रानू के बेचैन रहती
ऐसी है रानू की जेनी!
जेनी की आँखों में रानू
और रानू की सांस है जेनी
मिनी की  तो प्यारी जेनी
भू: भू: करती उसकी   जेनी
रानू –जेनी मिनी-जेनी
मिनी-रानू  रानू -मिनी
 
एक माला में गुथी कहानी!





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