गुरुवार, 19 सितंबर 2013

बाघ को गुस्सा क्यों आता है ?

(12)
बाघ को गुस्सा क्यों आता है ?


• घनी रात में
• बीहड़ वन में
• दबे पावों
• जब कोई आता
• टीन बजा कर
• आग सुलगा कर
• रोशनी का
• जब  जाल बिछाता
• बिना खौफ़ के
• जल्दी-जल्दी
• छोटे –बड़े
• इन पेड़ों को
• लगता काटने।
• गुस्सा आता है तब
• बाघ को ।

• दूर- दराज से
• लौटती चिड़ियाँ
• पाती नहीं
• अपना घोंसला
• दर्द भरी
• चीं-चीं सुन कर
• दिल पिघलता है
• जब उसका
• गुस्सा तब आता है बाघ को।

• जब बोलती
• बेवश होकर
• हिरणी की माता
• गोली मारा
• मेरी बेटी को
• और उठा ले गए
• उसकी मुंह-बोली
• बहन शीतली’ को
• मैं बच गयी
• नहीं तो अनाथ
• हो जाता  बबुआ ।,
• गाड़ी में भर कर
• आए थे नवजवान
• शहर के ।
• और कर गए
• यह उपकार हमारा ।
• आँखों में थे आँसू
• पर गुस्सा आया  तब बाघ को ।

• कटते जाते पेंड यहाँ से
• वन-रक्षक की मिली-भगत से
• नदी-नालों पर पुल बन गए ।
• आवाजाही शुरू हो गयी
• सुरसा की तरह शहर फैल गया
• बचा-खुचा  जंगल है अब तो
• सदियों का यह  ठौर- ठिकाना
• उजड-रहा है –उजड़ रहा है
•  यही-देख कर गुस्सा आता है बाघ को
• शेर ने बहुत समझाया
• गुस्सा करना बहुत बुरा है
• जितना जंगल बचा हुआ है
• उसमें  ही  मरना-खपना है
•  समय बदल गया है
• रहा नहीं अब जंगल अपना ।
• न रहा मैं अब जंगल का राजा ।
• बूढ़े शेर की बात
• बाघ समझ नहीं पाता
• इसीलिए तो आता है गुस्सा !






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