•
• (10)
•
•गिनती
एक ईश्वर
एक ख़ुदा
और एक जीसस
सूरज एक
चाँद एक
और एक आसमान ।
जगत का श्रीष्टिकर्ता -
ब्रह्मा एक है।
एक के बाद
आया दो ।
शिव-पार्वती
गणेश- लक्ष्मी
राधा – कृष्ण
क्या नहीं हैं दो ?
तीन बीच में बोल पड़ा
तीन देव हैं-
ब्रह्मा-विष्णु -महेश
और त्रिनेत्र हैं
देवों के देव महादेव।
बेलपत्र में तीन पात हैं
जिससे पूजे जाते शिव ।
चार था गुमसुम
बोला उसने-
ब्रह्मा जी के चार मुख
चार भुजाएँ लक्ष्मी-सरस्वती की ।
चार वेद हैं वेदव्यास के ।
चार दिशाओं से आतीं है
जीवनदायनी मंद हवाएँ ।
पाँच का तो बड़ा भाग्य है
पंचमुखी हनुमान हैं
पंचामृत ही महा प्रसाद है
पाँच तत्व से निर्मित काया
पञ्च -तत्व मैं विलीन होती है ।
अब छ्ह कि बारी आई –
वह निराश क्यों कर होगा?
छ्ह ऋतुयों से सजती धरती ।
छठ तो महान पर्व है
सूर्यदेव की होती पूजा ।
सात है कला का प्रेमी
इंद्र्धनुष के सात रंगों में
घुला-मिला है ।
नारद की वीणा से निकला
सप्त स्वर है ।
और है दिवस सात ।
आठ तो पूजनीय है ।
अष्टमी के दिन
कृष्ण - जन्म का
उत्सव होता
जन्माष्टमी महापर्व है ।
माँ दुर्गा की आठ भुजाएँ
सजती है अस्त्र-शस्त्र से ।
नवमी के दिन
हुये प्रभु प्रगट कृपाला ।
नव ग्रह की पूजा होती ।
नव कलश सजते
नवरस है जीवन के ।
दसमी तो विजयादशमी है ।
दशानन का वध हुआ था ।
अनाचार का अंत हुआ था ।
यों दस -
दो अंकों का जोड़ा
एक के बारे में जाना
और शून्य -
दर्शनशास्त्र का अभिन्न अंग है।
जीवन शून्य है ...
शून्य दिया भारत ने
विश्व को अनूठा उपहार ।
• (10)
•
•गिनती
एक ईश्वर
एक ख़ुदा
और एक जीसस
सूरज एक
चाँद एक
और एक आसमान ।
जगत का श्रीष्टिकर्ता -
ब्रह्मा एक है।
एक के बाद
आया दो ।
शिव-पार्वती
गणेश- लक्ष्मी
राधा – कृष्ण
क्या नहीं हैं दो ?
तीन बीच में बोल पड़ा
तीन देव हैं-
ब्रह्मा-विष्णु -महेश
और त्रिनेत्र हैं
देवों के देव महादेव।
बेलपत्र में तीन पात हैं
जिससे पूजे जाते शिव ।
चार था गुमसुम
बोला उसने-
ब्रह्मा जी के चार मुख
चार भुजाएँ लक्ष्मी-सरस्वती की ।
चार वेद हैं वेदव्यास के ।
चार दिशाओं से आतीं है
जीवनदायनी मंद हवाएँ ।
पाँच का तो बड़ा भाग्य है
पंचमुखी हनुमान हैं
पंचामृत ही महा प्रसाद है
पाँच तत्व से निर्मित काया
पञ्च -तत्व मैं विलीन होती है ।
अब छ्ह कि बारी आई –
वह निराश क्यों कर होगा?
छ्ह ऋतुयों से सजती धरती ।
छठ तो महान पर्व है
सूर्यदेव की होती पूजा ।
सात है कला का प्रेमी
इंद्र्धनुष के सात रंगों में
घुला-मिला है ।
नारद की वीणा से निकला
सप्त स्वर है ।
और है दिवस सात ।
आठ तो पूजनीय है ।
अष्टमी के दिन
कृष्ण - जन्म का
उत्सव होता
जन्माष्टमी महापर्व है ।
माँ दुर्गा की आठ भुजाएँ
सजती है अस्त्र-शस्त्र से ।
नवमी के दिन
हुये प्रभु प्रगट कृपाला ।
नव ग्रह की पूजा होती ।
नव कलश सजते
नवरस है जीवन के ।
दसमी तो विजयादशमी है ।
दशानन का वध हुआ था ।
अनाचार का अंत हुआ था ।
यों दस -
दो अंकों का जोड़ा
एक के बारे में जाना
और शून्य -
दर्शनशास्त्र का अभिन्न अंग है।
जीवन शून्य है ...
शून्य दिया भारत ने
विश्व को अनूठा उपहार ।
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